Tag Archives: गृहस्ती

गृहस्त

अपने घर से दूर रहने वाले दंपतियों में से जब पत्नी गृहनगर जाती है तब कुछ पतियों की दशा/दुर्दशा को उन्ही के भावों में सहेजती हुई यह रचना प्रस्तुत है। यह संभव हैं की कई पति इन बातों से भावुक … Continue reading

Posted in Poetry, Writing | Tagged , | Leave a comment