Category Archives: Poetry

समय

कह गए संत-सुजान रे, समय बड़ा बलवान रे, जिसके पक्ष समय खड़ा है, भारी वह पलड़ा जान ले, समय बड़ा बलवान रे। पक्ष-विपक्ष बस फेर समय का, कब-क्या किसके पल्ले बांध दे, समय सुधारे समय बिगाड़े, पलटे बहती धार रे, … Continue reading

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रघुराई

सूखे समतल, बीहड़ जंगल, रिक्त कमण्डल, निर्जल अंचल, सहज-समझ लघु रघुराई वात प्रदूषित, ग्रास भी दूषित, श्रवण अनुचित, इन्द्रियाँ मुर्छित, मरण है निश्चित रघुराई छवि अभिमानी, मति अज्ञानी, कृति मनमानी, फली जीवहानी, गति जग-नाशी रघुराई

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मैंने सोचा

मैंने सोचा, आज से सोचना छोड़ते हैं आखिर क्या होगा जो बिन सोचे कुछ करते हैं जैसे कई नासमझ गर्व से अकड़ते अपनी अक्ल की कमी पर कसीदे गढ़ते हैं वैसे ही हम भी कुछ नासमझी करते बिन सोचे, सोच-समझ … Continue reading

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शिव

महा शिवरात्रि के इस पावन पर्व पर सभी को शुभकामनाएं एवं संयम महाकाल के श्रीचरणों में यह रचना अर्पित करता हुँ। शीश धरे शशि, जटा धरी गंगा, सर्प सुशोभित सम सुमन माला, भस्म रमाए चिर सन्यासी, कंठ समाये विष विशम्भर, … Continue reading

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क्या हम स्वाधीन है?

हमारे 68वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर, राष्ट्र की यथास्थिति स्वयं से यह प्रश्न करने को विवश कर रही हैं। जिस प्रकार की अशांति, अराजकता व्याप्त है वह हमारे स्वाधीन होने पर प्रश्न उठा रहे हैं। प्रजा बड़ी प्राचीन … Continue reading

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यादें

मैं भूला तो नहीं, पर याद नहीं रहता, वक़्त की धूल से सब साफ नहीं दिखता। धुंधली सी झलक आती है आँखों के सामने, बस वक़्त का तकाज़ा ध्यान नहीं रहता। यादों की तस्वीरों में वक़्त की दिमग लगी है, … Continue reading

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दरख़्त

मैं दरख़्त हुँ, इसलिए सख्त हुँ। जड़ नही जड़ों से जुड़ा हुआ, ज़मीन पर खड़ा हुँ। कोपल से फट कर, आकाश की और बढ़ता हुँ। मैं खोखला नही, समय के साथ ठोस बना हुँ। हर परिस्थिति से, लड़ कर खड़ा … Continue reading

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