Category Archives: Poetry

देसी-विदेशी

देश मे देसी कहा बचे हैं, घोर विदेशी बने हुए हैं, खोज में देसी उत्पादों की, यंत्र विदेशी ले घूम रहे हैं। डॉलर बन गया चना था देसी, स्वीट-कॉर्न हो गया भुट्टा देसी, नस्ल विदेशी फसल विदेशी, देश की मिट्टी … Continue reading

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गृहस्त

अपने घर से दूर रहने वाले दंपतियों में से जब पत्नी गृहनगर जाती है तब कुछ पतियों की दशा/दुर्दशा को उन्ही के भावों में सहेजती हुई यह रचना प्रस्तुत है। यह संभव हैं की कई पति इन बातों से भावुक … Continue reading

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कहानी

जब कभी हम कोई कहानी या उपन्यास पढ़ते है तो अक्सर अपने आप को उससे जुड़ा पाते है। किसी चरित्र या पात्र से स्वयं के साथ समानता देखने या ढूंढने लगते है। ये मेरा अपना अनुभव तो नही पर कुछ … Continue reading

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कल्पना

​आसमान क्या पेड़ है कोई,                     जिसके तारे जैसे फल। लटके रहते जो शाखों पर,                     टीम-टीम करते रात -भर। कोई छोटा … Continue reading

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मजदूर

1 मई, अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस जो लगभग एक सदी पहले से मनाया जा रहा है पर आज भी मजदूर की हालत जस की तस है। उसके अधिकारों के लिये कोई नही लड़ रहा। वह खुद परिस्थितियों से जूझ रहा है। … Continue reading

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कोई…

तन की सुंदरता के पीछे मन का मेल छुपाये कोई, नैन-नक्ष पर मोहित होते मन के भाव न देखे कोई, छल-कपट से भरे हुए जो होते है संसार में कोई, सगा-पराया कुछ न देखे स्वार्थ के आगे बचे न कोई, … Continue reading

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दर्द

पिछले कुछ समय से दर्द के साथ समय बिताते हुए उसके भिन्न-भिन्न पहलुओं को एक दर्द निवारक मल्हम के विज्ञापन व हास्य रस के दिवंगत श्रेष्ठ कवि पंडित ओम व्यास जी की रचना से प्रेरणा लेकर अपनी इन पंक्तियों में … Continue reading

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