Category Archives: Poetry

चिंतन

कभी कही ऐसे ही बैठे-बैठे जीवन के प्रश्न पर चिंतन-मनन करते हुए कुछ विचार इसप्रकार आये – लड्डू से नुक्ती बटने तक बंधा हुआ क्यूं जीवन सारा? जनम-मरण के चक्र में उलझा, इससे ऊपर उठ ना पाया। मन समाज के … Continue reading

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सड़क पार…

करनी मुझे सड़क थी पार, चौपायों से भरा बाज़ार, प्रियतम मेरी राह निहारे, सौच-सौच रक्तचाप बढ़ाए, कब आएंगे वो इस पार, चितकबरी धारी वाली पट्टी पर, बहुत किया फिर सौच विचार, कैसे करूँ इस सड़क को पार, करता रहा मैं … Continue reading

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गाँव

भारत जैसे विकासशील राष्ट्र में किसीं गाँव का महत्व उतना ही होता है जितना कि इमारत के निर्माण में नींव का होता है। पर गाँवो कि यथास्थिति दयनीय है। उसी पर अपने मन के विचार इस कविता में लिखने का … Continue reading

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हिंदी भाषी

अभी कुछ दिनों पहले हमारी राज-भाष के स्मरण में ‘हिंदी दिवस’ धूमधाम से सार्वजनिक माध्यमों (सोशल मीडिया) पर मनाया गया। कई लोगों के लिए जो मात्र राज-भाषा है, मेरे लिए वही मातृ-भाषा है। और जिस प्रकार से हिंदी भाषी अधूरे … Continue reading

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ग्रहण

पूर्णिमा के चंद्र पर ग्रहण की छाया अमावस की भांति अंधकार सा छाया चंद्र ग्रहण सम सूर्य ग्रहण भी आया रक्त-तप्त पर क्षणिक शीतल छाया अंधविश्वास भी खूब निभाया सूतक-सुदगाल, संकट का साया अन्न-जल उस क्षण वर्जित माना अशुद्ध सिद्ध … Continue reading

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रेल यात्रा

पिछले दिनों एक लंबी रेल यात्रा का अनुभव किया जिसने कुछ पंक्तियों को लिखने के लिए प्रेरित किया। भाती-भाती के लोग है आते, भिन्न-भिन्न व्यहवार दिखाते, कोई थोड़ा घुल-मिल जाते, या फिर अलग-थलग हो जाते, धड़क-धड़क स्टेशन आते, कुछ नये … Continue reading

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देसी-विदेशी

देश मे देसी कहा बचे हैं, घोर विदेशी बने हुए हैं, खोज में देसी उत्पादों की, यंत्र विदेशी ले घूम रहे हैं। डॉलर बन गया चना था देसी, स्वीट-कॉर्न हो गया भुट्टा देसी, नस्ल विदेशी फसल विदेशी, देश की मिट्टी … Continue reading

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