Category Archives: Writing

हिंदी भाषी

अभी कुछ दिनों पहले हमारी राज-भाष के स्मरण में ‘हिंदी दिवस’ धूमधाम से सार्वजनिक माध्यमों (सोशल मीडिया) पर मनाया गया। कई लोगों के लिए जो मात्र राज-भाषा है, मेरे लिए वही मातृ-भाषा है। और जिस प्रकार से हिंदी भाषी अधूरे … Continue reading

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ग्रहण

पूर्णिमा के चंद्र पर ग्रहण की छाया अमावस की भांति अंधकार सा छाया चंद्र ग्रहण सम सूर्य ग्रहण भी आया रक्त-तप्त पर क्षणिक शीतल छाया अंधविश्वास भी खूब निभाया सूतक-सुदगाल, संकट का साया अन्न-जल उस क्षण वर्जित माना अशुद्ध सिद्ध … Continue reading

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रेल यात्रा

पिछले दिनों एक लंबी रेल यात्रा का अनुभव किया जिसने कुछ पंक्तियों को लिखने के लिए प्रेरित किया। भाती-भाती के लोग है आते, भिन्न-भिन्न व्यहवार दिखाते, कोई थोड़ा घुल-मिल जाते, या फिर अलग-थलग हो जाते, धड़क-धड़क स्टेशन आते, कुछ नये … Continue reading

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देसी-विदेशी

देश मे देसी कहा बचे हैं, घोर विदेशी बने हुए हैं, खोज में देसी उत्पादों की, यंत्र विदेशी ले घूम रहे हैं। डॉलर बन गया चना था देसी, स्वीट-कॉर्न हो गया भुट्टा देसी, नस्ल विदेशी फसल विदेशी, देश की मिट्टी … Continue reading

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गृहस्त

अपने घर से दूर रहने वाले दंपतियों में से जब पत्नी गृहनगर जाती है तब कुछ पतियों की दशा/दुर्दशा को उन्ही के भावों में सहेजती हुई यह रचना प्रस्तुत है। यह संभव हैं की कई पति इन बातों से भावुक … Continue reading

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कहानी

जब कभी हम कोई कहानी या उपन्यास पढ़ते है तो अक्सर अपने आप को उससे जुड़ा पाते है। किसी चरित्र या पात्र से स्वयं के साथ समानता देखने या ढूंढने लगते है। ये मेरा अपना अनुभव तो नही पर कुछ … Continue reading

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कल्पना

​आसमान क्या पेड़ है कोई,                     जिसके तारे जैसे फल। लटके रहते जो शाखों पर,                     टीम-टीम करते रात -भर। कोई छोटा … Continue reading

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