Author Archives: upx86

समय

कह गए संत-सुजान रे, समय बड़ा बलवान रे, जिसके पक्ष समय खड़ा है, भारी वह पलड़ा जान ले, समय बड़ा बलवान रे। पक्ष-विपक्ष बस फेर समय का, कब-क्या किसके पल्ले बांध दे, समय सुधारे समय बिगाड़े, पलटे बहती धार रे, … Continue reading

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रहते थे

रहते थे अकड़ में हम भी बड़े, बस उम्र थी छोटी काम बड़े। बारूद पर चढ़ कर खेल किए, लिये आँख में शोले चिंगारी भरे। रहते थे अकड़ में… देते थे पलट कर चार सुना, कोई जो टोंके एक दफा। … Continue reading

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मेंगई

भिया मेंगई की मार पे इंदौरी के विचार प्रस्तुत है रस्ते के जो भाटे है, दुनियाभर के घाटे है, साले सब अपने ही माथे है! कित्ता भी भले कमा लिया, पर ढ़ेला भर नि बच पा रिया, कुछ-बी समझ नि … Continue reading

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रघुराई

सूखे समतल, बीहड़ जंगल, रिक्त कमण्डल, निर्जल अंचल, सहज-समझ लघु रघुराई वात प्रदूषित, ग्रास भी दूषित, श्रवण अनुचित, इन्द्रियाँ मुर्छित, मरण है निश्चित रघुराई छवि अभिमानी, मति अज्ञानी, कृति मनमानी, फली जीवहानी, गति जग-नाशी रघुराई

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मैंने सोचा

मैंने सोचा, आज से सोचना छोड़ते हैं आखिर क्या होगा जो बिन सोचे कुछ करते हैं जैसे कई नासमझ गर्व से अकड़ते अपनी अक्ल की कमी पर कसीदे गढ़ते हैं वैसे ही हम भी कुछ नासमझी करते बिन सोचे, सोच-समझ … Continue reading

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उधार

बौझ उधार का बहुत भारी होता हैं, ये जाकर उससे पुछो जो सच मे ढ़ोता हैं। जो देकर उधार खुद भूल जाए, वो उपकारी निर्मोही होता हैं। और निःस्वार्थ दान जो देता, वही करदाता होता हैं। पर जो खुद किराये … Continue reading

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शिव

महा शिवरात्रि के इस पावन पर्व पर सभी को शुभकामनाएं एवं संयम महाकाल के श्रीचरणों में यह रचना अर्पित करता हुँ। शीश धरे शशि, जटा धरी गंगा, सर्प सुशोभित सम सुमन माला, भस्म रमाए चिर सन्यासी, कंठ समाये विष विशम्भर, … Continue reading

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