Monthly Archives: July 2017

देसी-विदेशी

देश मे देसी कहा बचे हैं, घोर विदेशी बने हुए हैं, खोज में देसी उत्पादों की, यंत्र विदेशी ले घूम रहे हैं। डॉलर बन गया चना था देसी, स्वीट-कॉर्न हो गया भुट्टा देसी, नस्ल विदेशी फसल विदेशी, देश की मिट्टी … Continue reading

Posted in Poetry, Writing | Leave a comment