Monthly Archives: June 2017

गृहस्त

अपने घर से दूर रहने वाले दंपतियों में से जब पत्नी गृहनगर जाती है तब कुछ पतियों की दशा/दुर्दशा को उन्ही के भावों में सहेजती हुई यह रचना प्रस्तुत है। यह संभव हैं की कई पति इन बातों से भावुक … Continue reading

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कहानी

जब कभी हम कोई कहानी या उपन्यास पढ़ते है तो अक्सर अपने आप को उससे जुड़ा पाते है। किसी चरित्र या पात्र से स्वयं के साथ समानता देखने या ढूंढने लगते है। ये मेरा अपना अनुभव तो नही पर कुछ … Continue reading

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कल्पना

​आसमान क्या पेड़ है कोई,                     जिसके तारे जैसे फल। लटके रहते जो शाखों पर,                     टीम-टीम करते रात -भर। कोई छोटा … Continue reading

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