Monthly Archives: November 2016

बचपन

बचपन, जाने कही खो गया है, नटखट, जाकर कही सो गया है। शांति तो नहीं है जीवन में उसके न होने से, पर सन्नाटा जरुर हो गया है। बचपन, जाने कही खो गया है… बचपन, कितना सजीव था, उत्साह से … Continue reading

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अब तो हमें जागना होगा

आँगन में ना नीम है, ना जाम, ना आम बचा वो तो तुलसी माता है तो उनका इक क्यारा रखा छोटी सी गोरैया गायब उड़ते तोतो के झुण्ड भी गायब कोयल की कुहू-कुहू लुप्त हो गयी मौसम की भी घडी … Continue reading

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।। जय सियाराम – जय सियाराम ।।

जिन शब्दों का उच्चारण किसी निःशक्त मनुष्य के लिए ऊर्जा का स्त्रोत होता है, वही आज के समय में भगवान के नाम का स्मरण-भक्ति न रह कर अन्य कई रूपो का प्रर्याय बन गया है। समाज की संकीर्ण और कुंठित … Continue reading

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