Monthly Archives: August 2014

आज़ादी

अनमोल है ये आज़ादी तेरी,          कौड़ी के मौल मत तौल इसे कई फंदों पर झूले तो,          कितनो ने बलिदान दिए लहू बहा है, प्राण गए है,          सर कटे, संग्राम हुए तब गुलामी की जंज़ीरो से,          अपना … Continue reading

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जीवन संग्राम

मुश्किलों में चलने का अंदाज़ जुदा होता है, कदमो की रफ़्तार तेज़ और वक़्त थमा होता है। अड़चने पैरो में कांटो की तरहा चुभती है, उस दर्द में ही बढ़ने का जज़्बा छुपा होता है। हर कदम और मजबूती से … Continue reading

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