चुनाव !

आज के इस चुनावी परिपेक्ष मे हर व्यक्ति का अपना राजनीतिक मत है, या कहुँ तो वो किसी न किसी राजनीतिक दल का समर्थन कर रहा है । जहा राजनीति की बात होती है वहा भेद-भाव, आरोप-प्रत्यारोप आम बात है । राजनीति में मतभेद होना भी स्वाभाविक है परन्तु अगर हम देखे तो लोगो में मत-भेद नहीं मन-भेद झलक रहा है । वे राजनीतिक दलों का समर्थन विचारधारा से परे जाकर कट्टर रूप से कर रहे है । इस प्रकार की कट्टरता दुष्प्रचार और दुर्व्यह्वार को जन्म दे रही है । वे अन्य लोगो पर अपने विचार थौपने में लगे है, ये मैं किसी एक दल विशेष के लिए नहीं कह रहा । सभी दलों के समर्थक मर्यादा की सीमा लांघते हुए अपने दल को श्रेष्ठ सिद्ध करने में जी-जान से जुटे हुए है । इस द्वंद में वो मुद्दों को भूलते जा रहे है, विचारो से दूर होते जा रहे है । जिन राजनीतिक मुल्यो को ले कर कोई दल अस्तित्व में आता है, जिन के बल पर वो जनता के बिच अपनी साख बनता है उन्ही से वो दूर होता जाता है । एक स्वतंत्र राष्ट्र का नागरिक होने के नाते हमें किसी भी विचारधारा का अनुसरण करने की स्वतंत्रता है, अपने विचार प्रकट करने का अधिकार है । परन्तु इसका अर्थ ये नहीं के आप किसी और पर ये विचार थौप सकते है । और अगर किसी विचार को सिद्ध करने की आवश्यक्ता पड़े तो वो विचार अपने आप में साष्वत नहीं है । मेरे मानने में सभी बुद्धिजीवियों में सही और गलत की समझ होती है ।

परन्तु आज कि सामाजिक दशा मे जन-जन या तो गुटों मे बट गया है या बांट दिया गया है । अगर में इमानदारी की बात करूँ तो इसका अर्थ यह नहीं के में “आम आदमी पार्टी” का समर्थक हुँ, या फिर विकास के मुद्दे पर ज़ोर दूँ तो “भारतीय जनता पार्टी” का कार्यकर्त्ता । या आपसी सद्भाव और एकता की तो कोई कांग्रेस, सपा, बसपा फला-फला…। ये सारे मुद्दे तो हर किसी दल के चुनावी घोषणा पत्र में बड़े-बड़े अक्षरों में छपे होते है । अंतर सिर्फ उनकी प्राथमिकता का रह जाता है ।

मैं “आम आदमी पार्टी” बनाने से पहले जिसे आम आदमी कहा जाता था उन्ही मे से एक हुँ । आज अगर में खुद को आम आदमी कह दूँ तो लोग मुझे राजनीतिक दल का हिस्सा समझते है । मेरा स्वयं का द्रष्टिकोण किसी दल या व्यक्ति विशेष से प्रभावित नहीं है और शेष सामान्य लोगो के लिए भी यथावत है । वे लोग जो अपने निर्णय के लिये स्वविवेक के स्थान पर अन्य पर निर्भर होते है, वे ना ही इस प्रकार की मानसिकता को बल प्रदान करते है वरन उनके संकिर्ण द्रष्टिकोण को प्रोत्साहित करते है ।

इस अतिविशिष्ट निर्वाचन के समय मेरा सभी भारतीयों से यही निवेदन है के आप अपना निर्णय तथ्य, साक्ष्य और सामर्थ्य के आधार पर ले न की किसी के प्रभाव में आ कर । और मतदान अवश्य करे, यह आपका संवेधानिक अधिकार है ।

।। जय हिन्द ।।

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3 Responses to चुनाव !

  1. Vishal says:

    Mohit..it is an exceptional and unbiased article. Too good.

  2. Niranjan says:

    Rightly said Mohit

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